"खेल में सफलता के लिए पहलवानों का समर्थन - हिंदी कविता" (Khel mein Safalta ke liye Pahlwanon ka Samarthan - Hindi Kavita)

"एक मुक्केबाज जो अपने अधिकार के लिए लड़ रहा है, मुक्केबाजों के आंदोलन का समर्थन करती हुई कविता के ब्लॉग पोस्ट की तस्वीर"
स्त्री  सुरक्षा उनके  संघर्ष और हौसला पर क्रांतिकारी कविता
हमें झुका न पाएंगे

सोच सोच कर हृदय दहल जाता सत्ता के दावों से

क्या कुर्सी की टांग टिकी है बाहुबली भुजाओं पे?


सिंहासन की चकाचौंध धृतराष्ट्र बना देती कैसे

सभा दुशासन का प्रहास सुन सत्य भुला देती कैसे? 


कुंठा, प्रथा, आपदाओं को जीत समर जो आई हैं

चढ़ा तिरंगा आसमान जो मान जीत कर लाई हैं


दीवारें थी सरहद जैसी उनके भी हिस्से आई

किंतु हौसले के पंखों से नील गगन वह छू पाई


उठा चुनौती दिया पटखनी टूटे पितृ सत्ता मानक

तमगों से भारत चमका बेटी ने पाई नव हसरत


हाय व्यवस्था ये कैसी हर बार बेटियां छलती हैं

राजनीति के चौसर पर बिछती, लुटती और जलती हैं


किंतु दुशासन दमन हेतु नारायणी रूप धरी नारी

जंतर मंतर से होकर ललकार शेरनी की आई


संघर्षों के झूलों में जिसने जीवन का रस पाया

मांग रहे हैं न्याय आज है अडिग और अविचल काया


आते हैं दूर देहातों से हलधर साथ निभाने को

जुट रही युवाओं की टोली हक न्याय विधि से पाने को


मंदिर, मस्ज़िद, धर्मों के हो हल्ले से बाहर निकलो

सरकार बेटियों की पीड़ित आवाज सुनो कुछ तो बोलो!


हां न्याय हमारा भी हक है हम लेकर ही जाएंगे

कह दो तानाशाहों से वह हमें झुका न पाएंगे।

✍✍✍   

रागिनी प्रीत

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